Saturday, September 25, 2010

मामूली सा चाँद इस शहर का




















यहाँ की पृष्ठभूमि है इमारतें-
घरों के पीछे घर
घरों के ऊपर घर

ये शहर शहर नहीं
है अब आँगन
इन्हीं इमारतों के बीच घिरा

कभी कभी चाँद भी दिख जाता होगा
लोगों को फुर्सत में,
जब एक उजाले के स्त्रोत
को ले कर वो हो जाते होंगे विस्मित
और ताकते होंगे ठीक ऊपर।

मुँह और चाँद आमने-सामने
आज कितने दिनों बाद
इस शहर में ।


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