Sunday, September 26, 2010

इतने बड़े होकर भी कर दी पैंट में पेशाब ?




















मार के कराटे
कर देते थे तुम लाल ईंटा को ध्वस्त
और रख के रुमाल, बर्फ़ को चकनाचूर
तोड़वा लेते थे हॉकी स्टिक अपने मजबूत पेट में-
क्यूँ छुपा के चल रहे हो अपने तोंद को आज ?

ससर रहा है पेजामा
तशरीफ़ में चाबुक के निशान
लगता है चल गया हंटर वहाँ जोर से
और जब तुम्हारे चहेते अल्सेशियन ने ही
कुतर दिया चूतड़ तुम्हारा
तो नर्स को दिखाते आ रही शर्म?

तुम्हारी पशुता ने ही आज कर डाली
तुम्हारी पैंट गीली
अब पड़े रहो ऐसे ही बेबस
एक उल्टे तेलचट्टे की तरह


8 comments:

  1. ‌‌‌अच्छा ​लिखा है। बधाई

    ReplyDelete
  2. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

    ReplyDelete
  3. ‌‌‌अच्छा ​लिखा है। बधाई |

    ReplyDelete
  4. बहुत खूबसूरती के साथ शब्दों को पिरोया है इन पंक्तिया में आपने .......

    पढ़िए और मुस्कुराइए :-
    कहानी मुल्ला नसीरुद्दीन की ...87

    ReplyDelete
  5. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

    ReplyDelete