Monday, September 27, 2010

रखना मगर ख्याल से


















तुम्हारे लिए हैं ये शब्द
चुनकर बस ये ही शब्द
जो बयान करते हैं अपने मायने
जो है अब मेरा भी मतलब तुमसे

पर शब्दों से ज्यादा अहम है
जो आँखों में दिखता है
जो दिल में उबलता है

इन शब्दों का क्या ?
ये तो हैं मात्र
साथ लटकते तार पे कुछ अक्षर
जिनमे से कुछ उड़ भागते हैं
जब आती है हवा जोड़ से-
बदल जाते हैं शब्द फिर
नहीं रहते वही मायने


ये कुछ एहसास हैं तुम्हारे ही लिए
डरते थे ये तुम्हारी परिधि में प्रत्यक्ष होने से
बाँध के लाया हूँ बड़ी मुश्किल से इन्हें एक साथ

संभाल के रखना इन्हें
अगर न हो ठीक से देखभाल इनका
तो ये दिखने लगते हैं अलग-
पर ऐसा भी न करना कि
इन्हें सर पर ही चढ़ा दिया
और अत्यधिक खिला-पिला के कर दिया
इतना चौड़ा
कि देनी पड़ जाए इनकी बलि
हमारे रिश्ते की चौखट में


2 comments:

  1. हवा जोड़ से - हवा जोर से
    अत्याधिक - अत्यधिक

    @संभाल के रखना इन्हें
    अगर न हो ठीक से देखभाल इनका
    तो ये दिखने लगते हैं अलग-
    पर ऐसा भी न करना कि
    इन्हें सर पर ही चढ़ा दिया
    और अत्याधिक खिला-पिला के कर दिया
    इतना चौड़ा
    कि देनी पड़ जाए इनकी बलि
    हमारे रिश्ते की चौखट में

    पूर्ण प्रेम कविता।

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  2. बहुत बहुत शुक्रिया आपकी टिप्पणियों के लिए,
    पता चल रहा है कि लिख कर अच्छे से रिवाईस करना ज़रूरी है ।
    हाँलांकि 'जोड़' मैंने यहाँ जानबूझ कर इस्तमाल किया था, काफी जगह बोले जाने वाला शब्द समझ कर..
    आपकी निरंतर हौस्लाफ्ज़ाही के लिए एक बार फिर से धन्यवाद।

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