Tuesday, September 28, 2010

जिज्ञासा एक बालक की जो गणित में पास न हो सका



















एक पहुँचा संत
उठा के पत्थर
अगर फोड़ दे मेरा सर
तो इसे क्या समझूँ ?

मेरी बात का विषैलापन
या उसके साधना की विफलता ?

क्यूँ हो जाती है फाँसी माफ़
उस जघन्य अपराधी की
जब वो कर लेता है ख़ुदकुशी ?


मेरे चिट्ठे को लौटा देती
गुस्से से, बिन दिए जवाब
पर आकर बैठती मेरे ही बगल
दोनों सेक्शन की संयुक्त क्लास में

ये हमारी समीपता है या समापन ?


2 comments:

  1. समीपता है बुद्धू!
    आकर्षण कैसा जो निकटता बरजने न लगे?

    वैसे इस तरह के प्रश्न गणित में 100/100 पाने वाले के मन में भी आ सकते हैं।

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